Vrat & Tyohar on 01-Mar-2026 (Sunday)
Pradosh trayodashi vrat प्रदोष त्रयोदशी व्रत
Vrat & Tyohar on 01-Mar-2026 (Sunday)
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Pradosh trayodashi vrat प्रदोष त्रयोदशी व्रत
Pradosh trayodashi vrat
प्रदोष त्रयोदशी व्रत
त्रयोदशी सायं 6:31 तक
प्रदोष स्तोत्र और प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में अत्यंत गहरा आध्यात्मिक महत्व है। 'प्रदोष' का अर्थ है - संध्या काल या गोधूलि बेला (सूर्यास्त के समय)और 'व्रत' का अर्थ है - भगवान शिव के प्रति समर्पण। प्रदोष स्तोत्र के पाठ के साथ किया गया यह व्रत मनशरीर और आत्मा को शुद्ध करने वाला माना जाता है।
प्रदोष स्तोत्र और व्रत का आध्यात्मिक महत्व निम्नलिखित है:
आंतरिक शुद्धता और कर्मों का शमन: प्रदोष का अर्थ ही है 'दोषों का नाश करने वाला' (प्र + दोष)। मान्यता है कि इस समय महादेव और माता पार्वती की पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों और पूर्व जन्मों के नकारात्मक कर्मों से मुक्ति मिलती है।
शिव-शक्ति का मिलन और एकाग्रता: प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नंदिकेश्वर के साथ नृत्य करते हैं (प्रदोष नृत्य)। यह समय शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का है। इस समय व्रत रखने से साधक का मन एकाग्र होता है और उसे मानसिक शांति व चेतना (consciousness) की उच्च अवस्था प्राप्त होती है।
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